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प्रकृति के उपचार का नियम!

प्रकृति के उपचार का नियम क्या है? प्रकृति के उपचार का नियम है, “एक समान और मजबूत बीमारी एक समान और कमजोर बीमारी को खत्म करती है। “सिमिलिया सिमिलिबस क्युरेंचर”, “समः समम शमयति” अर्थात समान ही समान का शमन करता है अर्थात जैसे को तैसा।

होमियोपैथी क्या है? क्यों होमियोपैथी?

अगर एक पंक्ति में कहा जाए तो होमियोपैथी “आदर्श उपचार” की एकमात्र पद्धति है। वह उपचार जो रोगी को स्वास्थ्य की प्रकृतिक अवस्था में पुनः स्थापित कर दे।

होमियोपैथी चिकित्सा से पहले यह समझना जरूरी है।

अक्सर लोग पूछते हैं कि होमियोपैथी में फलाना रोग की कौन सी दवा है? यह समझ लेना चाहिए कि अक्सर जिसे रोग कहा जाता है, वह केवल एक लक्षण या किसी एक अंग से संबंधित लक्षण होते हैं, जबकि रोग का कारण रोगी की जीवनी शक्ति में अव्यवस्था होती है।

हर मौका एक समस्या है और हर समस्या एक मौका!

अक्सर जो होता है मौका, उसे लोग समझ लेते हैं समस्या। क्योंकि मौका हमेशा पहले भेष बदलकर ही आता है। अर्थात समस्या के रूप में ही वह नजर आता है।

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