प्रकृति के उपचार का नियम!

प्रकृति के उपचार का नियम क्या है? प्रकृति के उपचार का नियम है, “एक समान और मजबूत बीमारी एक समान और कमजोर बीमारी को खत्म करती है। “सिमिलिया सिमिलिबस क्युरेंचर”, “समः समम शमयति” अर्थात समान ही समान का शमन करता है अर्थात जैसे को तैसा।

Every opportunity is a problem and every problem an opportunity!

What looks does not happen and what happens does not look. Often what is an opportunity, people understand it as a problem. Because opportunity always comes in disguise. That’s why, it appears as a problem. Let us try to understand this in detail in the present situation. Now a days every person is repeating the (more…)

होमियोपैथी चिकित्सा से पहले यह समझना जरूरी है।

अक्सर लोग पूछते हैं कि होमियोपैथी में फलाना रोग की कौन सी दवा है? यह समझ लेना चाहिए कि अक्सर जिसे रोग कहा जाता है, वह केवल एक लक्षण या किसी एक अंग से संबंधित लक्षण होते हैं, जबकि रोग का कारण रोगी की जीवनी शक्ति में अव्यवस्था होती है।

हर मौका एक समस्या है और हर समस्या एक मौका!

अक्सर जो होता है मौका, उसे लोग समझ लेते हैं समस्या। क्योंकि मौका हमेशा पहले भेष बदलकर ही आता है। अर्थात समस्या के रूप में ही वह नजर आता है।

पसंद या जरुरत? व्यापार या उपचार?

पसंद है लोगों की जो, वो करना व्यापार है। जरुरत है लोगों की जो, वो करना उपचार है।।